देवभूमि भारत के तीर्थो का महत्व मानव जीवन में एवं हिन्दू सनातन संस्कृति में

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देवभूमि भारत के तीर्थो का मानव जीवन में एवं हिन्दू सनातन संस्कृति में महत्व, इनकी उपयोगिता, इनसे मिलने वाले लाभ तथा इनसे मिलने वाला फल

मित्रो, यदि बिना किसी भी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, अथवा कार्य का माहात्म्य जाने बगैर जो भी कार्य किया जाता है ! उसका परिणाम अविश्वास, अश्रद्धा, उसका त्याग ,उसकी उपेक्षा आदि हो सकता है ! जो कि मानव जीवन के लिए अत्यंत घातक सिद्ध हो सकता है ! इसलिए हमें हर स्तर पर हर किसी का महत्व जरूर पता होना चाहिए ! चलिए तो जानते है तीर्थो का महत्व -;

आज के दैनिक जीवन में मानव जाती के अधिकतम लोग दुःख, रोग, शोक, भय आदि से पीड़ित रहते है ! जिसके कारण उनका ह्रदय बिना अग्नि के ही सदैव जलता रहता है एवं मन में शांति, प्रसन्नता, स्थिरता कि प्राप्ति नहीं हो पाती और व्यथित मन होने के कारण बुद्धि भी सही से निर्णय नहीं ले पाती है ! जिससे कार्यो में उत्साहहीनता कि प्राप्ति होती है ! आज के मानव के होठो से वास्तविक हंसी तो मानो गायब सी हो चुकी है ! उसके सुख की कल्पना और कामना अथक प्रयासों के बावजूद पूर्ण नहीं हो पा रही है

ऐसी स्थिति में मानव जाती को जहां पर जाकर अथवा जिसे प्राप्त करके मन में शांति , हृदय को सुकून ,बुद्धि को स्थिरता प्राप्त हो ! अंतःकरण में सकारात्मकता और पवित्रता उत्पन्न हो ! मन से भय ,शोक, दुःख ,अज्ञानता, नकारात्मकता का नाश होता हो ! इस जीव का यह लोक और परलोक सुधरता हो ! ईश्वर की भक्ति तथा प्राप्ति का मार्ग प्रशक्त होता हो ! यही उनका वास्तविक मह्त्व है !

इसके अलावा शास्त्रों में तीर्थो के द्वारा महान विपत्तियों को पार करने की बात, मनोकामना पूर्ति एवं देवकृपा प्राप्ति आदि के बारे में कहा गया है ! तीर्थो से हमें चरित्रिक विकास, आध्यात्मिक विकास, सांस्कृतिक एकता ,राष्ट्रीय एकता की भी प्राप्ति होती है !

और अंत में यु कह सकते है कि मानव परम कल्याण को प्राप्त होता है एवं उसका जीवन सार्थक होता है !

मित्रो तीर्थो की महिमा है जिसका वर्णन करना सामान्य व्यक्ति के बस कि बात नहीं है फिर भी जितना हो सका मेने व्यक्त किया ! आपको मेरी ये पोस्ट कैसी लगी चाहे अच्छी लगी या कोई कमी दिखाई दी कमेंट बॉक्स में जरूर बताये आपके सुझाव एवं सहयोग से ही मै अपने इस कार्य को बेहतर व आगे बढ़ा सकता हूँ !

यदि कोई गलती हो तो क्षमा

धन्यवाद

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