तीर्थ स्थलों की यात्रा, तीर्थ यात्रा क्यों करे, तीर्थ यात्रा करने का मुख्य उद्देश्य क्या है ? भाग – १

why do pilgrimage according to Hindu sanatan culture and religion in India main purpose and importance of pilgrimage part-1

तीर्थ स्थलों की यात्रा, तीर्थ यात्रा क्यों करे, कैसे करे अथवा कब करे तीर्थ यात्रा करने के महत्व अथवा लाभ एवं उद्देश्य,सनातन हिन्दू धर्म में तीर्थ यात्रा करने के पीछे छिपी धार्मिक एवं वैज्ञानिक मान्यताये, परम्पराये अथवा नियम । तीर्थ यात्रा करने से किसको मिलता है कितना फल और कैसे भाग- 1

प्रिय मित्रो नमस्कार, जैसा कि मै आपको अपनी चौथी पोस्ट “तीर्थ के प्रकार मेँ” बता चुका हूँ ! कि कुछ तीर्थ ऐसे होते हैं जिनके पास हमे चलकर जाना होता हैं ! जिनमे सनातन तीर्थ, भगवदीय तीर्थ, वर्तमानीय तीर्थ शामिल हैं ! जो कि पवित्र नदियों, सागरो ,जलाशयों के समीप अथवा हरे- भरे घने जंगलो मेँ या पवित्र पर्वतो पर स्थित हैं !

साधारण शब्दों में – : उन पवित्र तीर्थो की यात्रा करना अथवा दर्शन करना ही तीर्थ यात्रा कहलाता हैं! तीर्थ यात्रा के दौरान कई तरह की परिक्रमाएं भी की जाती है। उन सभी परिक्रमाओं के करने के अलग अलग समय होते हैं। कुछ तीर्थ की परिक्रमाएं जो कि निम्नलिखित है !

तीर्थ परिक्रमाएं -: जैसे चौरासी कोस परिक्रमा, अयोध्या, उज्जैन या प्रयाग पंचकोशी यात्रा, राजिम परिक्रमा आदि। इसके अंतर्गत नदी परिक्रमा भी आती है। जैसे नर्मदा, गंगा, सरयु, क्षिप्रा, गोदावरी, कावेरी परिक्रमा आदि। चार धाम परिक्रमा:- जैसे छोटा चार धाम परिक्रमा या बड़ा चार धाम यात्रा। पर्वत परिक्रमा:- जैसे गोवर्धन परिक्रमा, गिरनार, कामदगिरि, तिरुमलै परिक्रमा आदि।

मित्रो, मै अपने इस ब्लॉग में इन्ही तीर्थो अर्थात तीर्थ स्थलों के बारे में आपको विस्तृत रूप में बताने का प्रयत्न करूँगा और आपसे भी निवेदन हैं कि यदि आप इस पोस्ट अथवा ब्लॉग के विषय के सम्बन्ध में कुछ भी जानकारी रखते हैं। तो मेरे साथ उसे अवश्य साझा करे ! तो अब हम बात कर रहे हैं तीर्थ यात्रा की-;

तीर्थ यात्रा का हिन्दू संस्कृति और हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। इसलिए हिन्दू धर्म से संबंधित हर जन जाति के मनुष्य की दिली इच्छा रहती है. कि वह अपने जीवन में भारत के सभी तीर्थो के दर्शन करके, अपने जीवन को सफल करे। जिसके लिए मनुष्य अपना घर बार बच्चे छोडकर यात्रा पर निकल जाता है, कभी कभी तो वह अपने जीवन भर की सारी सम्पत्ति को भी एक बार में न्यौछावर करने के लिए तैयार हो जाता है। सवाल यह उठता है कि तीर्थो में ऐसा क्या है। जिसके लिए मनुष्य यह त्याग करने के लिए तैयार हो जाता है और इस त्याग की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है

हम इन बातो को कुछ बिन्दुओ के माध्यम से जानेगें जो निम्नलिखित है

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,तीर्थो का धार्मिक एवं वास्तविक या मूल उद्देश्य,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

हिन्दू धर्म के अनुसार संसार में मानव के जीवन के चार प्रमुख लक्ष्य माने जाते है। जिसको पूर्ण करने हेतु मनुष्य का पृथ्वी पर जन्म हुआ है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ((मोक्ष का व्यावहारिक अर्थ होता है। आत्मज्ञान या परमज्ञान को उपलब्ध होना। इसे योग में समाधि, जैन धर्म में कैवल्य, बौद्ध धर्म में निर्वाण प्राप्त करना कहा जाता है।))

इन चारो में भी “मोक्ष “को मुख्य लक्ष्य बताया गया हैं ! जो कि अर्थ और काम के द्वारा धर्म के मार्ग पर चलने से प्राप्त होगा ! अर्थ अर्थात धन तो तीर्थ यात्रा करने में खर्च होता है। अत: इसकी प्राप्ति तीर्थो में नही होती है। सीधी भाषा में कहा जाए तो चाहे आप कितने भी तीर्थो के दर्शन करते रहो ! वहा आपको धन की प्राप्ति नही हो सकती। धन, राज-भोग, विलास इन सब की कर्मो से प्राप्ति होती है।

धर्म, काम और मोक्षं इन तीनो की प्राप्ति तीर्थ यात्रा से हो जाती है। लोगो की तीरथ यात्रा करने के पिछे, अलग- अलग इच्छा अथवा कामनाएँ होती है। जो मनुष्य सात्विक है, वो केवल मोक्षं के लिए तीर्थ यात्रा करते है। जो व्यक्ति सात्विक और राजसी वृत्ति के है, वे धर्म के लिए तीर्थ यात्रा करते है। और जो व्यक्ति केवल राजसी वृत्ति के है, वे संसारिक और परलौकिक कामनाओ की सिद्धि के लिए तीर्थ यात्रा करते है।

परंतु जो व्यक्ति निष्काम भाव से यात्रा करते है, केवल उन्हें ही मोक्षं प्राप्त होता है। जो व्यक्ति सकाम भाव से तीरथ यात्रा करते है, उन्हे इस लोक में स्त्री- पुत्र आदि और परलोक में स्वर्ग की प्राप्ति होती है, परंतु उन्हे मोक्षं प्राप्त नही हो सकता। यहाँ पर तीर्थ यात्रा का मूल उद्देश्य तो मोक्ष प्राप्ति ही हैं ! मूल उद्देश्य के साथ तीर्थो की स्थापना के पीछे कई अन्य उद्देश्य भी है जो कि एकमात्र मानवजाति की भलाई के लिए ही है जो कि निम्नलिखित है-; शारीरिक, मानसिक, शैक्षिणिक, सांस्कृतिक, आर्थिक आध्यात्मिक, दार्शनिक लाभ अथवा महत्व एवं उद्देश्य।

जिनका में अपनी अगली पोस्ट में वर्णन करूँगा


यदि कोई गलती हो तो क्षमा

धन्यवाद्

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