तीर्थ किसे कहते है, तीर्थ का वास्तविक अर्थ हिन्दू सनातन संस्कृति में

what is called a pilgrimage the real meaning of a pilgrimage in hindu sanaatan culture

नमस्कार मित्रो

जैसा कि मैने अपनी पिछली पोस्ट ” भारतीय तीर्थ – भारत देश की पहचान, शान, अस्तित्व और स्वाभिमान” मे भारतीय तीर्थ स्थानों की महिमा के बारे मे कुछ वर्णन किया था । आशा करता हूँ कि आपको मेरी पहली पोस्ट अच्छी लगी होगी और यदि अच्छी नहीं भी लगी हो तो भी आपसे निवेदन है, कि इसका कारण जरूर कमेंट बॉक्स मे बताये। ताकि मै अपने ब्लॉग अथवा पोस्ट में की जाने वाली गलतियों को सुधार सकूँ । इसके अलावा आपसे निवेदन है कि मै अपने इस ब्लॉग को कैसे अच्छा बनाऊ मुझे सुझाव अवश्य दे । आपके सहयोग से ही मै अपने इस ब्लॉग को उन्नत बना सकता हूँ ।

तो अब बात करते है इस पोस्ट की-;

तीर्थ किसे कहते है तीर्थ का अर्थ अत्यंत ही विस्तृत है अथवा यूँ कह सकते है की बहुत ही विशाल और गहरा है

जिसे मै अपने टूटे फूटे शब्दों में व्यक्त करने की कोशिश कर रहा हूँ । सामन्यतः तीर्थ संस्कृत भाषा का एक शब्द है । जिसमे भेद करने पर तीर अर्थात तीर = किनारा और अथ = स्थित जो किसी नदी अथवा पवित्र सरोवर के किनारे पर स्थित हो उसे तीर्थ कहते है ।

एक अन्य शब्दों में तीर्थ अर्थात जो पवित्र करने वाला हो, जो ह्रदय को सुकून, मन को शांति और बुद्धि को स्थिरता प्रदान करे । जो पुण्य प्रदान करने वाला हो, जो मोक्ष प्रदान कर सके तीर्थ कहा जाता है।अब वह स्थान कोई नदी, तालाब, सरोवर, मठ, मंदिर आदि अन्य कुछ भी हो सकता है ।

यह स्थान कही कही भू भाग के अद्भुत प्रभाव से, कही-कही गंगा आदि पवित्र नदियों के सान्निध्य से, कही कही ऋषि, मुनियो अथवा संत महात्माओ कि तपोभूमि ,समाधिस्थल , रहवास स्थल होने से अथवा भगवान के अवतारों कि लीला भूमि होने से पुण्यप्रद व शांति प्रदान करने वाले माने गए है। इनमे सबसे प्रमुख 7 पूरी 4 धाम 12 ज्योतिर्लिंग व 51 शक्ति पीठ कही गए है । इसी प्रकार से गंगा,यमुना,सरस्वती, नर्मदा, गोदावरी, शिप्रा प्रमुख पवित्र नदियाँ बताई गयी है ।

जैसे कि मैने आपको उपरोक्त शब्दों में बताया कि – “तीर्थ पवित्र करने वाला, ह्रदय को सुकून, मन को शांति, बुद्धि को स्थिरता प्रदान करने वाला” आदि हो सकता है ।

तो यदि इस मान्यता के आधार पर देखा जाये तो माता-पिता, गुरुजन, बड़े बुजुर्ग लोग, वास्तविक संत- महात्मा भी साक्षात् तीर्थ ही है ।क्योकि एक संतान को उसके माता-पिता पल-पल इस लोक व परलोक को संवारने में संरक्षण, सहयोग व मार्दर्शन प्रदान करते है। इसलिए मानव के लिए उसके माता- पिता ही सर्वप्रथम तीर्थ है।

गुरु-जन अपने शिष्यों को सही मार्गदर्शन प्रदान करते है । इसलिए शिष्य के लिए गुरुजन तीर्थ है ।

बड़े बुजुर्ग व्यक्तियों के पास जीवन का अनुभव होता है । जो कि वि हमसे साझा करके हमारे जीने का मार्ग प्रशस्त करते है इसलिए वे भी तीर्थ है।

अंत में वास्तविक संत महात्मा जन इस संसार में स्वयं का व मानव जाती का समस्त प्रकार के प्रयासों द्वारा दुखो से उद्धार करते है । इसलिए वे भी तीर्थ है।

मित्रो यह है तीर्थ का संक्षिप्त अर्थ । आपको यह पोस्ट कैसी लगी कृप्या कमेंट बॉक्स में टिप्पणी जरूर करे । जिससे कि मुझे आगे इस प्रकार से पोस्ट बनाने का उत्साह व मार्गदर्शन प्राप्त होता रहे

यदि कोई गलती हो तो क्षमा

धन्यवाद्

अगली पोस्ट -; तीर्थो का महत्व/उपयोगिता /लाभ

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