पांडुपोल हनुमान मंदिर, सरिस्का क्षेत्र अलवर राजस्थान जहाँ भीम जी ने अपनी गदा के प्रहार से पहाड़ तोड़कर बनाया था रास्ता तथा जहाँ पर हनुमान जी ने तोड़ डाला भीम जी की ताकत का अभिमान

पांडुपोल हनुमान मंदिर, सरिस्का क्षेत्र अलवर राजस्थान का ऐसा पवित्र तीर्थ स्थल है जहा पर पांडवो के अज्ञातवास के दौरान भीम जी ने रास्ता ना मिलने पर अपनी गदा के भयंकर प्रहार से पहाड़ को तोड़कर उसमे से निकलने के लिए रास्ता बनाया था और जहाँ पर हनुमान जी ने तोड़ डाला भीम जी की ताकत का अभिमान


1. पांडुपोल का इतिहास – Pandupol History In Hindi

मुख्य प्रवेश द्वार

Pandupol Hanumanji Mandir In Hindi, पांडुपोल का हनुमान मंदिर राजस्थान के सरिस्का राष्ट्रीय बाघ अभयारण्य के अंदर स्थित है। जिसमे भगवान हनुमान की एक विशाल मूर्ति वैराग्य स्थिति में स्थापित हैl अरावली रेंज के ऊंचे कगार वाले पहाड़ी के बीच,स्थित पांडुपोल का प्राचीन हनुमान मंदिर अलवर में सबसे अधिक देखी जाने वाली जगहों में से एक है। मंदिर के परिसर में, लंगूर, मकाक और कई प्रकार के पक्षियों और अपने भव्य 35-फुट झरने के लिए भी प्रसिद्ध है।


पांडुपोल हनुमान मंदिर इतिहास महाभारत के महाकाव्य की अवधि से 5000 साल पुराना माना जाता है पौराणिक कथा के अनुसार पांडवों ने निर्वासन के दौरान अपने जीवन कुछ साल पांडुपोल में बिताए थे यहाँ जिस स्थान पर भीम ने अपनी गदा से प्रहार किया जिससे पहाड़ मे दरवाजा निकल गया और पहाड़ पर बना दरवाजा ही पांडुपोल के नाम से स्थापित हो गया।

पांडुपोल घूमने के लिए तीर्थ यात्रियों के साथ-साथ प्रकृति व जीव प्रेमियों के लिए भी अलवर की शानदार जगहों में से एक

मंदिर का बाहरी क्षेत्र

2. पांडुपोल धाम का रहस्य – Pandupol Ka Rahasya In Hindi

मंदिर का आंतरिक दर्शन

आपको बता दे की और एक अन्य कथा के अनुसार, यह पांडुपोल वही स्थान  था जहा भगवान हनुमान ने भीम को पराजित कर उसके अभिमान पर अंकुश लगाया था।

महाभारत काल की एक घटना के अनुसार, द्रोपदी अपनी नियमित दिनचर्या के अनुसार इसी घाटी के नीचे की और नाले के जलाशय पर स्नान करने गई थी। एक दिन स्नान करते समय नाले में ऊपर से जल में बहता हुआ एक सुन्दर पुष्प आया। द्रोपदी ने उसे अपने कानो के कुण्डल में धारण करने के बारे में सोचा। स्नान के बाद महाबली भीम को वह पुष्प लाने को कहाँ तो महाबली भीम पुष्प की खोज करते हुए जलधारा की और बढ़ने लगे।

आगे जा कर महाबली भीम ने देखा की एक वृद्ध विशाल वानर अपनी पुँछ फैला आराम से लेटा हुआ था। वानर के लेटने से रास्ता पूर्ण तरह से अवरुद्ध था।

यहाँ संकरी घाटी होने के कारण भीम जी के निकलने का और कोई रास्ता नहीं था। भीमसेन जी ने वृद्ध वानर से कहा कि तुम अपनी पुंछ को रास्ते से हटाकर
एक और कर लो , तो वानर ने कहा कि मैं वृद्ध अवस्था में हुँ आप इसके ऊपर से निकल जाए। भीम जी ने कहा की में इसे लांघकर नहीं जा सकता कृपया पूछ हटाये। इस पर वृद्ध वानर ने कहा कि आप ही मुझे बलशाली दिखाई देते है। कृप्या आप ही इसे उठाकर एक तरफ कर दे। भीम जी ने उस वानर की पूंछ को उठाने की कोशिश की लेकिन उनसे वानर की पूंछ टस से मस नहीं हुई। बार बार प्रयास करने के बाद भी भीम जी उस वानर की पूंछ को हटा नहीं पाये और समझ गए की यह कोई साधारण वानर नहीं है।

भीमसेन ने वृद्ध वानर को अपने वास्तविक रूप में प्रकट होने की विनती की । इस पर वृद्ध वानर ने अपना वास्तविक स्वरुप प्रकट कर अपना परिचय हनुमान के रूप में दिया। तब भीम जी ने सभी भाइयो (पांडवो) को बुलाकर लेटे हूऐ वानर रूप में हनुमान जी की पूजा अर्चना की। इसके बाद वहा पर पांडवो ने हनुमान मंदिर की स्थापना की जो आज पांडुपोल हनुमान मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है । अब यहाँ हर मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालु जन पहुंचते है , यह मंदिर जन जन की आस्था का प्रतीक है।

3. पांडुपोल का मेला – Pandupol Dham Ka Prasidh Mela In Hindi

पांडुपोल हनुमान मंदिर का मेला अलवर का एक लोकप्रिय मेला है जो हर साल भादौ शुक्ल पक्ष की अष्टमी को भरता है। जहा बड़ी संख्या में दिल्ली, पंजाब, मध्यप्रदेश व अन्य जगहों से श्रद्धालु आते है।

4. पांडुपोल हनुमान जी के दर्शन का समय – Pandupol Hanuman Ji Mandir Timings In Hindi

पांडुपोल हनुमान मंदिर पर्यटकों के लिए प्रतिदिन सुबह 5.00 बजे से शाम 10.00 बजे तक खुला रहता है।

5. पांडुपोल हनुमान मंदिर का प्रवेश शुल्क – Pandupol Hanuman Ji Mandir Entry Fees In Hindi

पांडुपोल हनुमान मंदिर तीर्थ यात्रियों के घूमने के लिए बिलकुल फ्री है| यहाँ मंदिर में घूमने के लिए पर्यटकों को किसी भी प्रकार के शुल्क का भुगतान नही करना होता है।

6. पांडुपोल हनुमान मंदिर अलवर घूमने का सबसे अच्छा समय – Best Time To Visit Pandupol Hanumanji Mandir In Hindi

अगर आप पांडुपोल हनुमान मंदिर जाने का प्लान बना रहे है तो आपको बता दे की आप पांडुपोल हनुमान मंदिर घूमने जाने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे बेहतर समय माना जाता है। पांडुपोल हनुमान मंदिर जाने के लिए सर्दियाँ का समय आदर्श समय होता है क्योंकि इस दौरान मौसम बहुत सुहावना होता है।

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