मनोवांछित वर अथवा वधु पाने के लिए किया जाता है इस देवी का दर्शन पूजन माँ कात्यायनी शक्तिपीठ

माँ दुर्गा शारदीय नवरात्रि स्पेशल 2020 : माँ कात्यायनी शक्तिपीठ मंदिर वृन्दावन उत्तर प्रदेश 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ है यह स्थान। यहां माता सती के केश गिरे थे, इसका प्रमाण शास्त्रों में मिलता है।
राधारानी जी ने श्रीकृष्ण को वर रूप में पाने के लिए की थी मां दुर्गा के इस शक्तिपीठ की पूजा।
साथ ही जानिए माँ कात्ययानी का यह नाम क्यों पड़ा, इनका अदभुत स्वरुप, उपासना का महत्व आदि

नवरात्रि की अधिष्ठात्री माँ दुर्गा का छटवां स्वरूप माँ कात्यायनी

माँ दुर्गा के छठे स्वरूप का नाम कात्यायनी है। नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। उस दिन साधक का मन ‘आज्ञा’ चक्र में स्थित होता है। योगसाधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इस चक्र में स्थित मन वाला साधक माँ कात्यायनी के चरणों में अपना सर्वस्व निवेदित कर देता है। परिपूर्ण आत्मदान करने वाले ऐसे भक्तों को सहज भाव से माँ के दर्शन प्राप्त हो जाते हैं।

माँ कात्यायनी का अद्भुत स्वरुप

माँ कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत चमकीला और भास्वर है। इनकी चार भुजाएँ हैं। माताजी का दाहिनी तरफ का ऊपरवाला हाथ अभयमुद्रा में तथा नीचे वाला वरमुद्रा में है। बाईं तरफ के ऊपरवाले हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। इनका वाहन सिंह है।

माँ कात्यायनी मंत्र

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहन ।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी ॥

माँ का नाम कात्यायनी कैसे पड़ा

इसकी भी एक कथा है- कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे। उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए। इन्हीं कात्य के गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे। इन्होंने भगवती पराम्बा की उपासना करते हुए बहुत वर्षों तक बड़ी कठिन तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी माँ भगवती उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। माँ भगवती ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली।

कुछ समय पश्चात जब दानव महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बढ़ गया तब भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों ने अपने-अपने तेज का अंश देकर महिषासुर के विनाश के लिए एक देवी को उत्पन्न किया। महर्षि कात्यायन ने सर्वप्रथम इनकी पूजा की। इसी कारण से यह कात्यायनी कहलाईं।

ऐसी भी कथा मिलती है कि ये महर्षि कात्यायन के वहाँ पुत्री रूप में उत्पन्न हुई थीं। आश्विन कृष्ण चतुर्दशी को जन्म लेकर शुक्त सप्तमी, अष्टमी तथा नवमी तक तीन दिन इन्होंने कात्यायन ऋषि की पूजा ग्रहण कर दशमी को महिषासुर का वध किया था।

माँ कात्यायनी की उपासना का महत्व

नवरात्रि का छठा दिन माँ कात्यायनी की उपासना का दिन होता है। इनके पूजन से उपासक के भीतर अद्भुत शक्ति का संचार होता है व दुश्मनों का संहार करने में ये सक्षम बनाती हैं। इनका ध्यान गोधुली बेला में करना होता है।

माँ कात्यायनी की भक्ति और उपासना द्वारा मनुष्य को बड़ी सरलता से अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति हो जाती है। वह इस लोक में स्थित रहकर भी अलौकिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है।

माँ कात्यायनी का प्रिय भोग प्रशाद

नवरात्री के छटवे दिन माँ को शहद का भोग लगाना उत्तम रहता है।

माँ कात्यायनी का प्रिय रंग

ऋषि कात्यायन की पुत्री मां कात्यायनी को सफेद रंग प्रिय है, जो शांति का प्रतीक है। इस दिन विशेष रूप से सफेद रंग का प्रयोग शुभ रहेगा।

प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए माँ कात्यायनी की आराधना योग्य यह श्लोक

प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में छठे दिन इसका जाप करना चाहिए।

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
अर्थ : हे माँ! सर्वत्र विराजमान और शक्ति -रूपिणी प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ।

मनोवांछित वर प्राप्ति के लिए माँ कात्यायनी का मंत्र
जिन कन्याओ के विवाह मे विलम्ब हो रहा हो

माँ कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं। भगवान कृष्ण को पतिरूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्हीं की पूजा कालिन्दी-यमुना के तट पर की थी। ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं।

जिन कन्याओ के विवाह मे विलम्ब हो रहा हो, उन्हे इस दिन माँ कात्यायनी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, जिससे उन्हे मनोवान्छित वर की प्राप्ति होती है।

विवाह के लिये कात्यायनी मन्त्र-

ॐ कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि । नंदगोपसुतम् देवि पतिम् मे कुरुते नम:॥


माँ कात्यायनी शक्तिपीठ मंदिर वृन्दावन उत्तर प्रदेश

maa katyayani shakti peeth vrinavan

माँ कात्यायनी शक्ति पीठ मंदिर

भगवान श्री कृष्ण जी की नगरी वृन्दावन में भी माँ दुर्गा के 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ स्थित है। जिसे माँ कात्यायनी शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है।

इस मंदिर का नाम प्राचीन सिद्धपीठों में आता है। बताया जाता है कि, यहां माता सती के केश गिरे थे, इसका प्रमाण शास्त्रों में मिलता है। नवरात्र के मौके पर देश-विदेश से लाखों भक्त माता के दर्शन करने के लिए यहां आते हैं। बताया जाता है कि राधारानी ने भी श्रीकृष्ण को पाने के लिए इस शक्तिपीठ की पूजा की थी।

माँ कात्यायनी शक्ति पीठ का श्रीमद् भागवत में किया गया है उल्लेख

देवर्षि श्री वेदव्यास जी ने श्रीमद् भागवत के दशम स्कंध के 22 वें अध्याय में उल्लेख किया है-

कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।
नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नम:॥

हे कात्यायनि! हे महामाये! हे महायोगिनि! हे अधीश्वरि! हे देवि! नन्द गोप के पुत्र हमें पत‍ि के रूप में प्राप्‍त हों। हम आपकी अर्चना एवं वंदना करते हैं।

तब से आज तक यहां कुंवारे लड़के और लड़कियां नवरात्र के मौके पर मनचाहा वर और वधु प्राप्त करने के लिए माता का आशीर्वाद पाने के लिए आते हैं। मान्यता है जो भी भक्त सच्चे मन से माता की पूजा करता है, उसकी मनोकामना जल्द पूरी होती है।

माँ कात्यायनी मंदिर का इन्होंने करवाया था निर्माण

कात्यायनी पीठ मंदिर का निर्माण फरवरी 1923 में स्वामी केशवानंद जी ने करवाया था। मां कात्यायनी के साथ इस मंदिर में पंचानन शिव जी , विष्णु जी , सूर्य जी तथा सिद्धिदाता श्री गणेश जी की मूर्तियां हैं। लोग मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण देखते ही श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो जाते हैं और दिल और दिमाग में शांति पाते हैं।

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