मां कालरात्रि का एक ऐसा मंदिर जहां आराधना से निश्चित ही मिलता है संतान सुख

maa kalratri mandir indore M.P

shardiya navratri special 2020: maa kaalratri temple indore M.P माँ कालरात्रि के इस दरबार में मात्र एक बार गोद भरवाने से निश्चित ही प्राप्त होता है संतान सुख इसके साथ ही जानिए माँ कालरात्रि के अदभुत स्वरुप
माँ कालरात्रि की महिमा
माँ कालरात्रि की उपासना से मिलने वाला फल अथवा उपासना का महत्व
माँ कालरात्रि का अदभुत मंदिर
आदि के बारे में

माँ दुर्गा की सातवा स्वरुप माँ कालरात्रि के नाम से जाना जाता हैं।
दुर्गा पूजा के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है। इस दिन साधक का मन ‘सहस्रार’ चक्र में स्थित रहता है। इसके लिए ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है। सहस्रार चक्र में स्थित साधक का मन पूर्णतः माँ कालरात्रि के स्वरूप में अवस्थित रहता है। उनके साक्षात्कार से मिलने वाले पुण्य (सिद्धियों और निधियों विशेष रूप से ज्ञान, शक्ति और धन) का वह भागी हो जाता है। उसके समस्त पापों-विघ्नों का नाश हो जाता है और अक्षय पुण्य-लोकों की प्राप्ति होती है।

माना जाता है कि देवी के इस रूप से सभी राक्षस,भूत, प्रेत, पिसाच और नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है, जो उनके आगमन से पलायन करते हैं |

माँ कालरात्रि का अदभुत स्वरुप
इनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है। सिर के बाल बिखरे हुए हैं। गले में विद्धुत की तरह चमकने वाली माला है। इनके तीन नेत्र हैं। ये तीनों नेत्र ब्रह्मांड के सदृश गोल हैं। इनसे विद्धुत के समान चमकीली किरणें निःसृत होती रहती हैं। माँ की नासिका के श्वास-प्रश्वास से अग्नि की भयंकर ज्वालाएँ निकलती रहती हैं। इनका वाहन गर्दभ (गदहा) है। ये ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ की वरमुद्रा से सभी को वर प्रदान करती हैं। दाहिनी तरफ का नीचे वाला हाथ अभयमुद्रा में है। बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का काँटा तथा नीचे वाले हाथ में खड्ग (कटार) है।

माँ कालरात्रि का मंत्र
एक वेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकणी तैलाभ्यक्तशरीरणी।।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयड्करी।।

माँ कालरात्रि की महिमा
माँ कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं। इसी कारण इनका एक नाम ‘शुभंकारी’ भी है। अतः इनसे भक्तों को किसी प्रकार भी भयभीत अथवा आतंकित होने की आवश्यकता नहीं है। माँ कालरात्रि दुष्टों का विनाश करने वाली हैं। दानव, दैत्य, राक्षस, भूत, प्रेत आदि इनके स्मरण मात्र से ही भयभीत होकर भाग जाते हैं।

माँ कालरात्रि की उपासना का महत्व
इनकी उपासना से जीवन में आने वाली ग्रह बाधा से मुक्ति मिलती है। इनके उपासकों को अग्नि-भय, जल-भय, जंतु-भय, शत्रु-भय, रात्रि-भय आदि कभी नहीं होते। इनकी कृपा से वह सर्वथा भय-मुक्त हो जाता है। इनकी पूजा-अर्चना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है व दुश्मनों का नाश होता है, उपासक का तेज बढ़ता है।

माँ कालरात्रि के स्वरूप-विग्रह को अपने हृदय में अवस्थित करके मनुष्य को एकनिष्ठ भाव से उपासना करनी चाहिए। यम, नियम, संयम का उसे पूर्ण पालन करना चाहिए। मन, वचन, काया की पवित्रता रखनी चाहिए। वे शुभंकारी देवी हैं। उनकी उपासना से होने वाले शुभों की गणना नहीं की जा सकती। हमें निरंतर उनका स्मरण, ध्यान और पूजा करना चाहिए।

माँ कालरात्रि का पसंदीदा रंग
मां कालरात्र‍ि का पसंदीदा रंग गुलाबी है, अत: मां दुर्गा के इस स्वरूप के पूजन में नीला रंग का प्रयोग शुभ होता है। इस दिन नीला वस्त्र धारण करें।

माँ कालरात्रि का पसंदीदा भोग प्रसाद
सभी राक्षसों के लिए कालरूप बनकर आई मां दुर्गा के इस रूप को गुड़ का भोग अति प्रिय है।

प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य श्लोक
प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में सातवें दिन इसका जाप करना चाहिए।

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

अर्थ : हे माँ! सर्वत्र विराजमान और कालरात्रि के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। हे माँ, मुझे पाप से मुक्ति प्रदान करे।

ॐ ऐं ह्रीं क्रीं कालरात्रै नमः |

मां कालरात्रि का एक ऐसा मंदिर जहां आराधना से मिलता है संतान सुख
ऐसी मान्यता है कि देवी कालरात्रि की आराधना से संतान के सुख की प्राप्ति होती है।

maa kaalratri temple indore M.P

मध्य प्रदेश के इंदौर में कालरात्रि का एक ऐसा मंदिर है जहां निसंतान दंपत्ति बच्चे की चाहत में नवरात्र में जरूर मां की पूजा करते हैं। इस मंदिर में लोगों की अटूट आस्था है। लोगों का मानना है कि मंदिर में एक बार गोद भरवा लेने के बाद उनके आंगन में किलकारियां जरूर गूंजती हैं।

यहां पर आने वाले भक्त मां को तीन नारियल चढ़ाकर गोद भरने की याचना करता है। इस मंदिर के पुजारी श्रद्धालुओं को गले में बंधन बांधने के लिए मौली का धागा देते हैं। याचक को पांच हफ्तों तक यह धागा गले में बांधना होता है। यदि मुराद पूरी हो गई तो नियमानुसार पांच नारियलों का तोरण यहां के पेड़ पर बांधना होता है। अगर आप कभी इंदौर स्थित इस मंदिर का दर्शन करने जाएंगे तो मंदिर में लगे पेड़ पर ऐसे सैकड़ों तोरण बंधे हुए देखेंगे।

maa kaalratri temple indore M.P

कहा जाता है कि मंदिर में केवल रात के समय ही पूजा होती है। आरती के समय मोली की भी पूजा की जाती है। मंदिर की ख़ास बात यह है कि भक्त के घर बेटी पैदा होने पर उसे माँ दुर्गा का अंश माना जाता है। ऐसे में यहाँ बेटे से अधिक बेटी पाने के चाह रखते है।

भक्तो का मानना है कि यहाँ सिर्फ सुनी गोद ही नहीं भरती बल्कि सच्चे मन से मांगी हर मनोकामना पूरी होती है।

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