चलिए चलें माता चंद्रघंटा के भारत में स्थित इकलौते इस प्रसिद्ध मंदिर में

इलाहाबाद में नवरात्रि के तीसरे दिन पूजी जाने वाली माता चंद्रघंटा का भारत में स्थित इकलौता प्रसिद्ध मंदिर है। आइये जाने इस मंदिर के बारे में। वर्तमान में अलाहबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया गया है

माँ चन्द्रघंटा का परम शांतिदायक और कल्याणकारी स्वरुप

माँ दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन-आराधन किया जाता है। इस देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है। इसीलिए इस देवी को चंद्रघंटा कहा गया है। इनके शरीर का रंग सोने के समान बहुत चमकीला है। इस देवी के दस हाथ हैं। वे खड्ग और अन्य अस्त्र-शस्त्र से विभूषित हैं।

सिंह पर सवार इस देवी की मुद्रा युद्ध के लिए उद्धत रहने की है। इसके घंटे सी भयानक ध्वनि से अत्याचारी दानव-दैत्य और राक्षस काँपते रहते हैं।

देवी का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी माना गया है। उनका ध्यान हमारे इहलोक और परलोक दोनों के लिए कल्याणकारी और सद्गति देने वाला है।

इसीलिए कहा जाता है कि हमें निरंतर उनके पवित्र विग्रह को ध्यान में रखकर साधना करनी चाहिए। इस दिन साधक का मन ‘मणिपूर’ चक्र में प्रविष्ट होता है।

इस देवी की कृपा से साधक को अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं। दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और कई तरह की ध्वनियां सुनाईं देने लगती हैं। इन क्षणों में साधक को बहुत सावधान रहना चाहिए।

माँ चन्द्रघंटा की उपासना का अत्यंत कल्याणकारी महत्व

मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएँ विनष्ट हो जाती हैं और सभी रोग दूर हो जाते हैं। इनकी आराधना सदैव ही फलदायी है। माँ भक्तों के कष्ट का निवारण शीघ्र ही कर देती हैं। इनका उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय हो जाता है। इनके घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों को प्रेतबाधा से रक्षा करती है।

इनकी आराधना से वीरता-निर्भयता के साथ ही सौम्यता एवं विनम्रता का विकास होकर मुख, नेत्र तथा संपूर्ण काया में कांति-गुण की वृद्धि होती है। स्वर में दिव्य, अलौकिक माधुर्य का समावेश हो जाता है। माँ चंद्रघंटा के भक्त और उपासक जहाँ भी जाते हैं लोग उन्हें देखकर शांति और सुख का अनुभव करते हैं।

माँ के आराधक के शरीर से दिव्य प्रकाशयुक्त परमाणुओं का अदृश्य विकिरण होता रहता है। यह दिव्य क्रिया साधारण चक्षुओं से दिखाई नहीं देती, किन्तु साधक और उसके संपर्क में आने वाले लोग इस बात का अनुभव भली-भाँति करते रहते हैं।

इसलिए हमें चाहिए कि मन, वचन और कर्म के साथ ही काया को विहित विधि-विधान के अनुसार परिशुद्ध-पवित्र करके चंद्रघंटा के शरणागत होकर उनकी उपासना-आराधना करना चाहिए।

इससे सारे कष्टों से मुक्त होकर सहज ही परम पद के अधिकारी बन सकते हैं। यह देवी कल्याणकारी है।

माँ चन्द्रघंटा का मंत्र :-

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥

माँ चन्द्रघंटा का पसंदीदा रंग

मां चंद्रघंटा की आराधना में हरे रंग का विशेष महत्व है। इस दिन हरे रंग का प्रयोग कर मां की कृपा एवं सुख शांति प्राप्त की जा सकती है।

माँ चन्द्रघंटा का प्रिय भोग प्रशाद

शेर पर सवारी करने वाली माता को दूध का भोग प्रिय है।

चलिए चलें माता चंद्रघंटा के इस प्रसिद्ध मंदिर में

इलाहाबाद वर्तमान नाम प्रयागराज में है माँ चंद्रघंटा का मंदिर

इलाहाबाद के एक व्यस्तम इलाके चौक में स्थित है मां क्षेमा माई का अति प्राचीन मंदिर। पुराणों में भी इस मंदिर का विशेष वर्णन है।

यहां पर देवी दुर्गा, माता चंद्रघंटा के स्वरूप में विराजमान हैं। वैसे इस मंदिर को इकलौता ऐसा मंदिर माना जाता है जहां मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का एक साथ दर्शन होता है। कहते हैं इस मंदिर में दर्शन मात्र से ही मानव को सारे मानसिक व शारीरिक कष्टों से छुटकारा मिल जाता है।

नवरात्रि में होते हैं विशेष आयोजन

नवरात्रि के दौरान इस मंदिर में विशेष आयोजन किए जाते हैं। इस समय यहां सामूहिक भजन-कीर्तन का कार्यक्रम होता है, और माता की प्रतिमा का श्रृंगार फूल व पत्तियों से किया जाता है।

दिनों के अनुसार श्रंगार

खास बात ये है कि इस मंदिर में नवरात्रि के हर दिन की देवी के अलग-अलग स्वरूपों का विशेष श्रृंगार किया जाता है। मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम मां का नवीन वस्त्र, आभूषण और पुष्पों से श्रृंगार करके सामूहिक आरती की जाती है। इस अवसर पर मन की मुराद पूरी करने के लिए भक्त व्रत और पूजन से शक्ति स्वरूपा मां भगवती की आराधना करते हैं। इस मंदिर में बैंडबाजे के साथ माता के विभिन्‍न प्रतीकों के निशान भी चढ़ाने की परंपरा है। कहते हैं इससे मां प्रसन्न होती हैं और भक्त की मनोकामना पूर्ण करती हैं।

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